बिना एचएसआरपी नंबर प्लेट वाले सरकारी ट्रकों पर कार्रवाई न होने से उठे सवाल, ट्रांसपोर्टरों में नाराजगी
बैकुण्ठपुर, 31 दिसंबर 2025।
कोरिया जिले में यातायात नियमों की सख्ती और निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। जहां आम नागरिकों और निजी वाहनों पर एचएसआरपी (High Security Registration Plate) न होने पर जुर्माना वसूला जा रहा है, वहीं सरकारी कार्यों में लगे कई ट्रक खुलेआम बिना एचएसआरपी नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं।
नियम लागू, लेकिन दोहरे मापदंड
स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि निजी वाहनों के लिए नियमों का पालन सख्ती से कराया जा रहा है, लेकिन शासकीय विभागों के लिए काम कर रहे ट्रकों को जांच में अनदेखा किया जा रहा है। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार, यदि नियम सभी के लिए समान हैं, तो सरकारी ट्रकों को भी एचएसआरपी नंबर प्लेट लगवाना अनिवार्य होना चाहिए।
“हमारे ट्रकों पर जुर्माना वसूला जाता है, जबकि सरकारी ट्रक बिना किसी कार्रवाई के खुलेआम दौड़ रहे हैं। इससे नियमों में समानता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं,” स्थानीय ट्रांसपोर्टरों ने दैनिक संवाद में बताया।
सरकारी ट्रकों का हाल
जानकारी के अनुसार, कई सरकारी विभागों के ट्रक—जिनका उपयोग निर्माण सामग्री, खनिज, कोयला और अन्य सामान के परिवहन में होता है—अब तक एचएसआरपी नंबर प्लेट से लैस नहीं हैं। बावजूद इसके इन पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर, निजी ट्रांसपोर्टरों को नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना भरना पड़ रहा है।
इस दोहरे मापदंड से ट्रांसपोर्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि नियमों में समानता न होने के कारण ट्रांसपोर्टर वर्ग में असंतोष फैल रहा है।
ट्रांसपोर्टरों की मांग
ट्रांसपोर्टरों ने मांग की है कि यातायात विभाग निष्पक्षता के साथ नियमों का पालन कराए। शासकीय और निजी दोनों प्रकार के वाहनों पर समान रूप से कार्रवाई होना चाहिए। यदि प्रशासन इस दिशा में कदम नहीं उठाता है, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का कहना है—
“नियम तो सभी के लिए हैं, लेकिन जब सरकारी ट्रकों को छूट मिलती है, तो आम ट्रांसपोर्टरों का मेहनत और लागत का सम्मान नहीं होता। प्रशासन को चाहिए कि वह नियमों की समानता सुनिश्चित करे और सभी वाहनों पर समान रूप से लागू करे।”
प्रशासन की भूमिका
अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है। ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि नियमों की निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो नियम केवल आम नागरिकों और निजी ट्रांसपोर्टरों के लिए बोझ बनकर रह जाएंगे।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी विभागों के वाहन नियमों के दायरे से बाहर हैं, या प्रशासन केवल दोहरे मापदंडों के चलते निष्पक्ष कार्रवाई से बच रहा है।
Karwahi hona chahiye
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