🔴 रबी सीजन खत्म, किसान खाली हाथ
📍 जामपारा समिति की लापरवाही से टूटी उम्मीदें
🟠 1. बीत गया रबी सीजन, खेत रहे सूने
जामपारा क्षेत्र में रबी फसल की बुवाई का समय कब का निकल चुका है। खेत तैयार थे, किसान मेहनत के लिए तैयार थे, लेकिन खाद और बीज के अभाव में ज़मीन पर हल तक नहीं चल पाया
🟠 2. कागजों में आया बीज, ज़मीन तक नहीं पहुंचा
सेवा सहकारी समिति को रबी फसल के लिए 60 क्विंटल गेहूं बीज मिला, लेकिन यह बीज किसानों तक कभी नहीं पहुंचा। पूरे सीजन में एक भी किसान को बीज नहीं दिया गया, जिससे शासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।
🟠 3. समय निकलते ही टूट गया किसानों का सपना
किसानों का कहना है कि अगर समय पर बीज मिल जाता, तो वे आसानी से गेहूं की बुवाई कर सकते थे। लेकिन अब सीजन निकल चुका है और पूरे साल की कमाई हाथ से निकल गई।
🟠 4. खाद वितरण सिर्फ नाम का
खाद वितरण की स्थिति और भी चिंताजनक रही।
➡️ दर्जनों किसानों में से
❌ केवल एक किसान को
-
1 बोरी यूरिया
-
1 बोरी NPK
दी गई।
बाकी किसान दिन-दिन भर समिति के चक्कर काटते रहे।
🟠 5. न सूचना मिली, न पारदर्शिता दिखी
किसानों का आरोप है कि समिति प्रबंधन ने
❌ न तो समय पर सूचना दी
❌ न ही वितरण सूची सार्वजनिक की
जिससे किसानों को आखिरी समय तक भ्रम में रखा गया।
🟠 6. समिति से जुड़ने का क्या मतलब?
किसानों में आक्रोश है। उनका सीधा सवाल है —
👉 “जब समिति होते हुए भी खाद-बीज नहीं मिलता, तो फिर समिति की जरूरत क्या है?”
🟠 7. कर्ज लेकर भी नहीं कर पाए खेती
कई किसानों ने
💸 कर्ज लिया
🚜 खेत तैयार कराए
लेकिन खाद-बीज न मिलने से उनकी पूरी तैयारी बेकार हो गई। अब वे आर्थिक संकट में फंसते नजर आ रहे हैं।
🟠 8. योजनाएं बनीं, ज़मीन पर नहीं उतरीं
सरकार की किसान हितैषी योजनाएं इस मामले में कागजों तक सीमित रह गईं। जिन संसाधनों से किसानों को फायदा मिलना था, वे समय रहते उन तक पहुंचे ही नहीं।
🟠 9. जिम्मेदारी तय करने की मांग
स्थानीय किसानों ने
📝 इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच
⚖️ समिति प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई
की मांग की है, ताकि आगे किसी किसान के साथ ऐसा न हो।
🟠 10. न्याय की राह देखता किसान
रबी फसल का मौका गंवाने के बाद अब किसान
👁️ शासन-प्रशासन की ओर उम्मीद से देख रहे हैं
कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें न्याय मिलेगा।