📰 कोरिया में मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर मंथन
स्थान एवं तिथि
📍कोरिया, 22 जनवरी 2026 | Har Sach News🔹 मामले की पृष्ठभूमि
जिले में मातृ मृत्यु और नवजात शिशुओं के कमजोर स्वास्थ्य को लेकर अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में नजर आ रहा है। लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से जिला पंचायत ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में कमी लाना और कम वजन वाले शिशुओं (LBW) के स्वास्थ्य में सुधार करना है।
🔔 कार्यक्रम की शुरुआत – दीप प्रज्ज्वलन के साथ संदेश
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मंच पर जिला पंचायत CEO डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी, यूनिसेफ राज्य सलाहकार डॉ. अक्षय तिवारी, डॉ. प्रीतम राय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह, सिविल सर्जन डॉ. आयुष जायसवाल, महिला-बाल विकास विभाग, नीति आयोग व प्रशिक्षण शाखा के अधिकारी मौजूद रहे। 🕯️
❓ बड़ा सवाल – ग्रामीण महिलाएं आज भी क्यों मर रही हैं?
प्रशिक्षण सत्रों में सबसे गंभीर मुद्दा यही रहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ मृत्यु के मामले आज भी क्यों सामने आ रहे हैं? विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार समय पर जांच नहीं होना, कुपोषण, एनीमिया और इलाज में देरी महिलाओं की जान पर भारी पड़ जाती है।
बैठक में साफ कहा गया कि केवल योजनाएं बनाना काफी नहीं, बल्कि मैदानी स्तर पर सख्त अमल जरूरी है।
🏥 एंटीनेटल केयर (ANC) की गुणवत्ता पर जोर
प्रशिक्षण में बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान एंटीनेटल केयर (ANC) की गुणवत्ता बेहतर किए बिना मातृ मृत्यु दर को कम नहीं किया जा सकता।
👉 समय पर जांच
👉 नियमित स्वास्थ्य निगरानी
👉 जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान
इन बिंदुओं पर विशेष चर्चा की गई।
🍎 पोषण की कमी – मातृ और शिशु स्वास्थ्य का सबसे बड़ा दुश्मन
कार्यक्रम में माना गया कि कुपोषण आज भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन और कार्बोहाइड्रेट न मिलने से मां और शिशु दोनों कमजोर हो रहे हैं।
पोषण सुधार को लेकर गांव-स्तर पर समितियों के गठन और समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया गया। 🥗
👶 कम वजन वाले शिशु – भविष्य के लिए खतरे की घंटी
LBW (Low Birth Weight) यानी कम वजन वाले शिशुओं को लेकर प्रशिक्षण में चिंता जताई गई। बताया गया कि ऐसे बच्चे आगे चलकर बीमारियों, कुपोषण और विकास संबंधी समस्याओं का शिकार बन सकते हैं।
समाधान के तौर पर—
✔ गर्भावस्था के दौरान सही पोषण
✔ नियमित जांच
✔ स्वास्थ्यकर्मी और आंगनवाड़ी की सक्रिय भूमिका
पर बल दिया गया।
🗣️ कलेक्टर का सख्त संदेश – कुपोषण पर कोई समझौता नहीं
कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधारने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। कुपोषण के खिलाफ लड़ाई हर स्तर पर जारी रहेगी।”
उन्होंने एनीमिया की रोकथाम और सुपोषण अभियान को मजबूत करने की बात कहते हुए कहा कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है। 💪
👩⚕️ स्वास्थ्यकर्मी और आंगनवाड़ी की जिम्मेदारी तय
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने कहा कि यह प्रशिक्षण सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव की तैयारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्वास्थ्यकर्मी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूरी ईमानदारी से काम करें तो मातृ मृत्यु और कम वजन वाले शिशुओं की संख्या में निश्चित कमी आएगी।
📌 जिले के लिए अहम पहल, लेकिन सवाल बरकरार
यह त्रिदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
लेकिन सवाल अब भी कायम है—
❓ क्या यह प्रशिक्षण कागजों से निकलकर गांवों तक पहुंचेगा?
❓ क्या हर गर्भवती महिला को समय पर जांच और पोषण मिलेगा?
Har Sach News इन सवालों के जवाब तलाशता रहेगा, क्योंकि यहां बात आंकड़ों की नहीं, मां और बच्चे की जिंदगी की है।
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