जांच में ट्रांसपोर्ट की घोर लापरवाही उजागर, अधिकारियों ने लगाई कड़ी फटकार
स्थान एवं तिथि
📍 कोरिया | 20 जनवरी 2025बैठकुंठपुर शहर के बाईसागर पारा क्षेत्र में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब तेरापंथ भवन के पास पशु चिकित्सा से संबंधित बड़ी मात्रा में दवाइयाँ अव्यवस्थित अवस्था में पड़ी हुई पाई गईं। सड़क किनारे खुले स्थान पर कार्टूनों में बिखरी इन दवाइयों को देखकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल बन गया। लोगों को आशंका थी कि यदि ये दवाइयाँ पशुओं या बच्चों के संपर्क में आ गईं, तो गंभीर दुर्घटना घट सकती है।
🚨 स्थानीय लोगों की सूचना पर विभाग हरकत में
मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने तुरंत पशु चिकित्सा विभाग को इसकी सूचना दी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएँ डॉ. विभा सिंह बघेल एवं औषधि निरीक्षक अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने सबसे पहले पूरे क्षेत्र को देखा और बिखरी पड़ी दवाइयों का गहन निरीक्षण किया।
जांच के दौरान पाया गया कि ये दवाइयाँ पूरी तरह असुरक्षित स्थिति में रखी गई थीं, जिनकी कोई निगरानी नहीं थी। खुले स्थान पर रखे जाने के कारण कई कार्टून फटे हुए थे और दवाइयाँ इधर-उधर फैल चुकी थीं।
🚚 आर.के. ट्रांसपोर्ट की लापरवाही आई सामने
अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मौके पर पाई गई दवाइयाँ आर.के. ट्रांसपोर्ट द्वारा लाई गई थीं। जानकारी के अनुसार, करीब 8 से 10 कार्टून में भरी ये दवाइयाँ 19 जनवरी की रात को तेरापंथ भवन के पास अस्थायी रूप से रखी गई थीं।
आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर बताया गया कि देर रात एक ट्रांसपोर्ट वाहन द्वारा इन दवाइयों को उतारकर छोड़ दिया गया था। न तो इन्हें किसी सुरक्षित गोदाम में रखा गया और न ही किसी प्रकार की देखरेख की व्यवस्था की गई।
🗣️ ट्रांसपोर्ट संचालक का बयान
जांच के दौरान ट्रांसपोर्ट संचालक श्री जगदीश कुक्षत्री को मौके पर बुलाया गया। उनके कथन के अनुसार, ये दवाइयाँ रायपुर वापस भेजे जाने के लिए अस्थायी रूप से यहां रखी गई थीं। उन्होंने बताया कि रात के समय आवारा पशुओं और बच्चों द्वारा कार्टून फाड़ दिए गए, जिससे दवाइयाँ बिखर गईं।
हालांकि अधिकारियों ने इस स्पष्टीकरण को गंभीर लापरवाही मानते हुए स्पष्ट किया कि औषधियों को खुले स्थान पर रखना नियमों के पूर्णतः खिलाफ है, विशेषकर तब, जब वे सरकारी आपूर्ति की हों।
⏳ 5–6 वर्ष पुरानी और अधिकांश एक्सपायर्ड दवाइयाँ
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। अधिकारियों के अनुसार, ये दवाइयाँ 5 से 6 वर्ष पूर्व बलरामपुर जिले के लिए मंगाई गई थीं, लेकिन उस समय मांग आदेश (डिमांड इंडेंट) न होने के कारण वापस कर दी गई थीं।
इसके बाद ये दवाइयाँ ट्रांसपोर्ट गोदाम में ही पड़ी रहीं और समय के साथ उनकी अवसान तिथि (एक्सपायरी डेट) समाप्त हो गई। मौके पर जांच में यह पाया गया कि अधिकांश दवाइयाँ एक्सपायर्ड हो चुकी थीं, जो किसी भी स्थिति में उपयोग के योग्य नहीं थीं।
⚠️ जन स्वास्थ्य और पशु स्वास्थ्य पर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसी एक्सपायर्ड दवाइयाँ गलती से पशुओं को दे दी जाएँ, तो इससे उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। वहीं, खुले में पड़ी दवाइयों से बच्चों के बीमार होने या जहरीले प्रभाव की भी आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि स्थानीय लोगों ने इस लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई।
🗑️ विधिवत विनष्टीकरण के निर्देश
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तत्काल निर्णय लेते हुए सभी दवाइयों को विधिवत विनष्टीकरण के लिए आर.के. ट्रांसपोर्ट संचालक को सुपुर्द किया। अधिकारियों की उपस्थिति में दवाइयों को सुरक्षित रूप से हटाया गया और नियमानुसार नष्ट करने के निर्देश दिए गए।
🛑 भविष्य के लिए सख्त चेतावनी
उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएँ डॉ. विभा सिंह बघेल ने ट्रांसपोर्ट संचालक को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी प्रकार की दवा या सरकारी सामग्री को इस तरह खुले और असुरक्षित स्थान पर न रखा जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि दोबारा ऐसी लापरवाही पाई गई, तो संबंधित ट्रांसपोर्ट एजेंसी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
📌 प्रशासन की सख्ती से टला बड़ा हादसा
समय रहते विभागीय अधिकारियों की सक्रियता से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि दवाइयों के भंडारण और परिवहन में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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