⚖️ विशेष न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी का कड़ा संदेश ⚖️
💰 21 हजार की रिश्वत कांड में PWD सब इंजीनियर को जमानत से इनकार
📍 कोरिया | ✍️HAR SACH NEWS | 📅 03 जनवरी 2026
🚨 भ्रष्टाचार पर सख्त रुख
भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) शैलेश कुमार तिवारी ने लोक निर्माण विभाग मनेन्द्रगढ़ में पदस्थ सब इंजीनियर छत्रपाल बंजारे (सी.पी. बंजारे) की जमानत याचिका खारिज कर दी।📄 अदालत की टिप्पणी
अदालत ने स्पष्ट कहा कि प्रकरण में आरोपी की प्रथम दृष्टया संलिप्तता परिलक्षित होती है। अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर है, ऐसे में आरोपी को जमानत का लाभ देना न्यायोचित नहीं है। यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अंबिकापुर द्वारा दर्ज अपराध क्रमांक 61/2025 से संबंधित है।🏗️ निर्माण कार्य का विवरण
अभियोजन के अनुसार, मनेन्द्रगढ़ व्यवहार न्यायालय परिसर में बार रूम विस्तार निर्माण कार्य का ठेका शिकायतकर्ता को दिया गया था। निर्माण कार्य की अनुमानित लागत लगभग ₹8.56 लाख थी। जून 2025 में कार्य प्रारंभ हुआ और एक चरण पूर्ण होने पर लगभग ₹2.99 लाख का भुगतान किया गया।💸 रिश्वत की मांग
अक्टूबर 2025 में निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद भौतिक सत्यापन एवं माप पुस्तिका में प्रविष्टि के लिए आरोपी से संपर्क किया गया। इसी दौरान आरोपी द्वारा ₹25 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया।📝 शिकायत और जांच
रिश्वत मांग से आहत होकर ठेकेदार ने एसीबी अंबिकापुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान रिश्वत मांग की पुष्टि हुई, जिसके बाद ट्रैप कार्रवाई की गई।🪤 रंगे हाथों गिरफ्तारी
📅 30 अक्टूबर 2025 को एसीबी टीम ने आरोपी को ₹21 हजार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके पर राशि जब्त कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई।⚖️ दर्ज धाराएं
आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।🧑⚖️ जमानत पर बहस
लोक अभियोजक ने डिजिटल वॉयस रिकॉर्डिंग, ट्रैप कार्रवाई और जब्ती पंचनामा जैसे साक्ष्यों के आधार पर जमानत का विरोध किया। वहीं बचाव पक्ष ने धारा 483 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत जमानत की मांग की, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।🔔 न्यायालय का संदेश
विशेष न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी की पदस्थापना और अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा। यह फैसला जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध न्यायपालिका के कठोर रुख का स्पष्ट संकेत है। न्यायालय का संदेश साफ है कि रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग के मामलों में कानून किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरतेगा।🛑