⚠️ बैकुण्ठपुर जनपद में आदेशों की खुलेआम अनदेखी
💸 15वें वित्त की राशि पर संकट, प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
स्थान एवं तिथि
📍 कोरिया | 🗓️ 15 जनवरी 2026🏛️ प्रशासनिक अनुशासन पर बड़ा सवाल
बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। ग्राम पंचायतों में जारी स्थानांतरण आदेशों का पालन न होना अब गंभीर चिंता का विषय बन गया है। नवंबर माह के पहले सप्ताह में कई ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए थे, लेकिन लगभग दो महीने बीत जाने के बाद भी न तो नए सचिवों ने कार्यभार संभाला और न ही पुराने सचिवों ने पद छोड़ा।
👉 यह स्थिति जिले में पहली बार देखने को मिल रही है, जब शासकीय आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
🚫 पंचायतों में कामकाज ठप
स्थानांतरण आदेशों की अनदेखी का सीधा असर ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है।
🔹 पंचायत कार्यालयों में ताले लटके हुए हैं
🔹 ग्रामीणों के जरूरी काम अटके पड़े हैं
🔹 शासन की योजनाएं कागजों तक सीमित हो गई हैं
🏠 प्रधानमंत्री आवास योजना
👵 पेंशन प्रकरण
👷 मनरेगा कार्य
📄 जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र
🪪 राशन कार्ड सुधार
इन सभी सेवाओं के लिए ग्रामीण पंचायत कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
📜 नियमों का खुला उल्लंघन
छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (ग्राम पंचायत सचिव) नियम, 2011 के अनुसार:
⏱️ स्थानांतरण आदेश जारी होने के 7 से 15 दिन के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य है।
⚖️ इसके अलावा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 की धारा-3 के तहत:
शासकीय आदेशों की अवहेलना को गंभीर अनुशासनहीनता माना जाता है।
❗ इसके अंतर्गत विभागीय जांच, वेतन रोक, निलंबन甚至 सेवा से बर्खास्तगी तक का प्रावधान है।
🏚️ तलवापारा पंचायत बना सबसे गंभीर उदाहरण
ग्राम पंचायत तलवापारा का मामला सबसे ज्यादा चौंकाने वाला बताया जा रहा है।
🚪 लगभग दो महीनों से पंचायत कार्यालय बंद
🔄 सचिव का स्थानांतरण हो चुका, लेकिन नया सचिव पदभार लेने नहीं पहुंचा
❓ पुराना सचिव भी पंचायत छोड़ने को तैयार नहीं
इस स्थिति ने ग्रामीणों को पूरी तरह असहाय बना दिया है।
😡 ग्रामीणों में उबाल
पंचायतों के पंच, वार्ड सदस्य और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
🗣️ ग्रामीणों का कहना है—
“योजनाएं सिर्फ फाइलों में चल रही हैं, जमीन पर कुछ नहीं हो रहा।”
📈 प्रशासन की चुप्पी से लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
🤝 संरक्षण और मिलीभगत के आरोप
सूत्रों के अनुसार—
🔸 नए सचिव द्वारा अधिकारियों से लगातार संपर्क कर स्थानांतरण रुकवाने की कोशिश
🔸 पुराने सचिव की भी उसी पंचायत में बने रहने की जिद
🤔 सवाल यह उठता है कि—
आखिर किन अधिकारियों के संरक्षण में शासकीय आदेशों की अनदेखी हो रही है?
💰 15वें वित्त आयोग की राशि पर खतरा
सबसे गंभीर मामला 15वें वित्त आयोग की राशि से जुड़ा है।
⚠️ नियमों के अनुसार स्थानांतरण के तुरंत बाद:
🔒 पंचायत खातों में होल्ड चार्ज लगाया जाना चाहिए
लेकिन—
❌ अब तक खातों में कोई होल्ड नहीं
❌ पुराने सचिवों के हस्ताक्षर चालू
👉 इससे वित्तीय अनियमितता और दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
🕵️♂️ जनपद अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में
अब तक जनपद पंचायत स्तर से कोई ठोस कार्रवाई न होना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
📌 यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए—
तो पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता और गहराएगी।
🔍 अब निगाहें जिला प्रशासन पर
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को उम्मीद है कि—
⚖️ जिला प्रशासन जल्द संज्ञान ले
📄 आदेशों की अवहेलना करने वाले सचिवों पर कार्रवाई हो
👮 जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए
अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब जागता है और कब तक पंचायत व्यवस्था को पटरी पर लाया जाता है।
