Type Here to Get Search Results !

HAPPY NEWS YEAR

BREAKING NEWS
ताज़ा खबरें लोड हो रही हैं...

Vishnu@97

प्रभास की सबसे उलझी फिल्म? ‘द राजा साब’ ने छोड़े सवाल

0

 🎬 द राजा साब रिव्यू: भव्यता बहुत, असर कम

⭐ भाषा: तेलुगु (डब – हिंदी, तमिल, मलयालम, कन्नड़)


📍 ind| 📅 09 जनवरी 2026

फिल्म द राजा साब देखने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या आज का सिनेमा सिर्फ भव्य सेट, भारी बजट और VFX तक सिमटकर रह गया है? प्रभास जैसे पैन इंडिया सुपरस्टार, करीब 400 करोड़ का बजट, हॉरर-कॉमेडी का नया पैकेज और मल्टी-लैंग्वेज रिलीज—सब कुछ होने के बावजूद यह फिल्म अंत तक पहुंचते-पहुंचते खोखली और दिशाहीन महसूस होने लगती है।

📖 कहानी: दिलचस्प आइडिया, कमजोर प्रस्तुति

फिल्म की कहानी शुरू होती है राजा (प्रभास) और उनकी दादी गंगम्मा (जरीना वहाब) से। अल्जाइमर से पीड़ित दादी अपने लापता पति कनकराजू (संजय दत्त) को नहीं भूल पातीं। दादी की इसी अधूरी उम्मीद के सहारे राजा अपने दादा की तलाश में निकल पड़ता है।

यह तलाश उसे हैदराबाद से होते हुए एक रहस्यमयी और कथित भूतिया महल तक ले जाती है, जहां
🔮 तंत्र-मंत्र
🌀 हिप्नोटिज्म
💰 लालच
👻 अतीत के राज
जैसे कई एलिमेंट मौजूद हैं।

कागज पर कहानी रोचक लगती है, लेकिन पर्दे पर आते-आते यह बिखर जाती है। फिल्म बार-बार बिना ठोस वजह के लोकेशन बदलती है, किरदार आते-जाते रहते हैं और दर्शक यही समझने में उलझा रह जाता है कि कहानी की असली दिशा आखिर है क्या।

🎭 एक्टिंग: कोशिश दिखती है, असर नहीं

👑 प्रभास इस बार हल्के-फुल्के और कॉमिक अवतार में नजर आते हैं। कुछ दृश्यों में उनकी टाइमिंग काम करती है, लेकिन किरदार में गहराई की कमी साफ दिखती है। कई सीन में उनका लुक और एक्सप्रेशन अननेचुरल लगते हैं।

👵 जरीना वहाब फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरती हैं। उनके इमोशनल सीन, खासकर क्लाइमैक्स के आसपास, फिल्म को थोड़ी गंभीरता देते हैं।

🦹 संजय दत्त का किरदार दमदार हो सकता था, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट उन्हें भी पूरी तरह खुलने नहीं देती।

👩‍🎤 मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल और रिद्धि कुमार कहानी का अहम हिस्सा बनने के बजाय सिर्फ ग्लैमर तक सीमित रह जाती हैं।

🎭 कॉमिक कलाकार कुछ जगह राहत देते हैं, लेकिन कमजोर लेखन उनकी भी ताकत छीन लेता है।

🎥 निर्देशन और टेक्निकल पहलू: सबसे बड़ी कमजोरी

डायरेक्टर मारुति की सबसे बड़ी चूक यही है कि फिल्म यह तय ही नहीं कर पाती कि उसे डराना है, हंसाना है या भावुक करना है
👻 हॉरर
😂 कॉमेडी
✨ फैंटेसी
❤️ इमोशन
सब कुछ एक साथ परोसा गया है, लेकिन संतुलन कहीं नजर नहीं आता।

✂️ एडिटिंग फिल्म को और भारी बना देती है। लगभग तीन घंटे की लंबाई दर्शकों को थका देती है।

📸 सिनेमैटोग्राफी औसत है और जरूरत से ज्यादा ग्रीन स्क्रीन इस्तेमाल फिल्म को नकली बना देता है।

💻 VFX इतने बड़े बजट के बावजूद कई जगह अधूरे और कमजोर लगते हैं।

🧠 सहायक किरदार

🎩 बोमन ईरानी एक साइकियाट्रिस्ट, हिप्नोटिस्ट और पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर के रोल में नजर आते हैं, लेकिन उनका किरदार भी कहानी में कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाता।

🎶 म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर

🎵 थमन का म्यूजिक फिल्म की जान नहीं बन पाता।
🔊 बैकग्राउंड स्कोर कई जगह जरूरत से ज्यादा तेज है, लेकिन प्रभावहीन।
🎶 गाने कहानी की रफ्तार तोड़ते हैं और कोई भी धुन याद नहीं रह पाती।

📝 फाइनल वर्डिक्ट

द राजा साब एक ऐसी फिल्म है जो आइडिया और बजट के स्तर पर बड़ी है, लेकिन कहानी और आत्मा के स्तर पर कमजोर
प्रभास की मेहनत दिखती है, कुछ सीन ठीक लगते हैं, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म
⏳ लंबी
😴 थकाने वाली
🧭 दिशाहीन
महसूस होती है।

करीब 400 करोड़ की भव्यता के बाद अंत में दर्शक के हाथ बस यही सवाल रह जाता है—
जब कहानी मजबूत नहीं थी, तो इतना बड़ा महल खड़ा करने की जरूरत क्या थी?

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.