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Vishnu@97

बंजर जमीन से खुशहाली तक: वनाधिकार पत्रक और मनरेगा ने बदली 17 वनवासी परिवारों की किस्मत

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🌾 वनांचल में खुशहाली की नई शुरुआत, वनवासी किसानों की मेहनत लाई रंग


😊 मेहनतकश वनवासी चेहरों पर आई आर्थिक मुस्कान

कोरिया जिले के वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे परंपरागत वनवासी परिवारों के जीवन में अब सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है। शासन की योजनाओं और किसानों की मेहनत से अब उनकी अपनी भूमि आजीविका का मजबूत साधन बन रही है।

📜 वनाधिकार पत्रक से मिला जमीन पर अधिकार

जनपद पंचायत सोनहत के अंतर्गत ग्राम पंचायत नटवाही तथा इसके आश्रित गांव चुलादर और कुर्थी में कुल 17 आदिवासी परिवारों को दो वर्ष पूर्व वनाधिकार पत्रक योजना के तहत भूमि का पट्टा प्रदान किया गया था। हालांकि यह भूमि असमतल, पथरीली और बंजर होने के कारण खेती योग्य नहीं थी।

🛠️ मनरेगा ने बदली बंजर जमीन की तस्वीर

भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत भूमि समतलीकरण और मेड़ बंधान कार्य को विकास योजना में शामिल किया गया। तकनीकी परीक्षण के बाद प्रत्येक किसान के लिए अलग-अलग प्रस्ताव तैयार किए गए।

कुल 11.06 हेक्टेयर भूमि सुधार के लिए 19 लाख 51 हजार 346 रुपये की राशि स्वीकृत की गई। ग्राम पंचायत को कार्य एजेंसी बनाकर 6,744 मानव दिवस का सृजन किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध हुआ।

🌱 समतल खेतों में लहलहाई फसल

भूमि सुधार कार्य पूर्ण होने के बाद किसानों ने खरीफ मौसम में धान को मुख्य फसल के रूप में अपनाया। इसके साथ ही गेहूं, मक्का और मटर जैसी अन्य फसलों की खेती भी प्रारंभ की गई। अनुकूल वर्षा और सतत मेहनत के चलते इस वर्ष भरपूर उत्पादन प्राप्त हुआ।

📊 उत्पादन ने बदली आर्थिक स्थिति

इन 17 वनवासी किसानों द्वारा इस वर्ष कुल 319 क्विंटल से अधिक धान और मक्का का उत्पादन किया गया। यह उत्पादन न केवल किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान कर रहा है।

🌈 आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते वनवासी परिवार

आज इन वनवासी परिवारों के खातों में परिश्रम की कमाई है और चेहरों पर आत्मनिर्भरता की संतोषजनक मुस्कान दिखाई दे रही है। यह पहल ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आदिवासी उत्थान की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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