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सरगुजा संभाग में बड़ा धान घोटाला! 1.40 लाख क्विंटल धान गायब, जिम्मेदार कौन?

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🌾 सरगुजा संभाग के धान संग्रहण केंद्रों से 1.40 लाख क्विंटल धान गायब 

❓ जिम्मेदारी तय होगी या फाइलों में दब जाएगा मामला?

 स्थान एवं तिथि

📍 बैकुण्ठपुर / सरगुजा संभाग

छत्तीसगढ़ में हर वर्ष धान खरीदी को सरकार “🎉 उत्सव” की तरह प्रस्तुत करती है। बड़े-बड़े दावे, बेहतर व्यवस्था और किसानों को समय पर भुगतान की बातें की जाती हैं। लेकिन जब इन दावों की वास्तविकता ज़मीनी स्तर पर परखी जाती है, तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है।

सरगुजा संभाग के पाँच जिलों से सामने आया ताजा मामला प्रशासनिक लापरवाही और संभावित आर्थिक घोटाले की ओर इशारा कर रहा है, जहाँ धान संग्रहण केंद्रों से लगभग 1 लाख 40 हजार क्विंटल धान का कोई ठोस हिसाब नहीं मिल पा रहा है ⚠️।

🏢 नई भंडारण व्यवस्था, लेकिन सवालों के घेरे में

राज्य सरकार ने वर्ष 2024–25 में धान भंडारण की नई व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत सरगुजा संभाग के सभी पाँच जिले—

  • 🟢 कोरिया

  • 🟡 सूरजपुर

  • 🔵 सरगुजा

  • 🟣 जशपुर

  • 🔴 बलरामपुर

में धान संग्रहण केंद्र स्थापित किए गए।

👉 समितियों से खरीदा गया धान इन केंद्रों में रखा जाना था और यहीं से मिलरों द्वारा उठाव होना था।
लेकिन अब जब खाद्य विभाग की शासकीय वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों की तुलना ज़मीनी हकीकत से की जा रही है, तो कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं ❗

📊 कोरिया जिला: रिकॉर्ड कुछ और, हकीकत कुछ और

कोरिया जिले के बड़गांव संग्रहण केंद्र में रिकॉर्ड के अनुसार—

  • 🌾 कुल खरीदी: 1,19,753 क्विंटल

  • 🚛 उठाव दिखाया गया: 1,14,188 क्विंटल

📌 इस हिसाब से केंद्र में करीब 5,401 क्विंटल धान मौजूद होना चाहिए था,
लेकिन मौके पर धान पूरी तरह गायब मिला 😳

👉 यानी कागजों में सब सही, लेकिन गोदाम खाली!

🧾 अन्य जिलों की स्थिति भी चिंताजनक

केवल कोरिया ही नहीं, बल्कि पूरे सरगुजा संभाग में हालात एक जैसे हैं 👇

  • 🟡 सूरजपुर: 37,353 क्विंटल

  • 🔵 सरगुजा: 74,911 क्विंटल

  • 🟣 जशपुर: 4,800 क्विंटल

  • 🔴 बलरामपुर: 17,652 क्विंटल

📌 रिकॉर्ड में यह धान अभी भी संग्रहण केंद्रों में दिखाया जा रहा है,
लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि इन केंद्रों में धान मौजूद नहीं है

➡️ कुल मिलाकर सरगुजा संभाग में 1,40,117 क्विंटल धान का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं

⚠️ बदहाल व्यवस्था, बढ़ता नुकसान

धान संग्रहण केंद्रों की अव्यवस्था भी सामने आ रही है—

  • 🌧️ नमी से बचाने के लिए खरीदा गया महंगा भूसा खुले में सड़ रहा है

  • 🧵 तिरपाल फट चुके हैं

  • 🏚️ रखरखाव की स्थिति बेहद खराब

  • 💸 शासन को लगातार आर्थिक नुकसान

👉 यह लापरवाही सिर्फ धान की नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों की भी बर्बादी है।

👨‍🌾 पहले और अब की व्यवस्था में बड़ा फर्क

पहले जब धान समितियों में रखा जाता था—

  • 📉 सूखती या कमी की जिम्मेदारी समिति प्रबंधकों की होती थी

  • 💰 वसूली भी उन्हीं से की जाती थी

अब सवाल यह है 👇
धान संग्रहण केंद्रों में हुई कमी या गुमशुदगी की जिम्मेदारी किसकी है?
किस अधिकारी या एजेंसी पर कार्रवाई होगी?

🔍 जांच होगी या मामला दबा दिया जाएगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि—

  • 🕵️‍♂️ क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होगी?

  • 📁 या फिर इसे कागजी कार्रवाई तक सीमित कर दिया जाएगा?

धान की यह गुमशुदगी सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि
👉 करोड़ों रुपये के सरकारी नुकसान और
👉 किसानों के भरोसे पर चोट है।

🗣️ आमजन और किसानों में चर्चा

अब यह मामला सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा।

  • 👥 आम नागरिक

  • 👨‍🌾 किसान

  • 🏘️ ग्रामीण क्षेत्र

सभी के बीच यही सवाल गूंज रहा है—
राज्य सरकार को हुए इस बड़े नुकसान की भरपाई आखिर कौन करेगा?

✍️ रिपोर्ट: Vishnu Singh जिला संवाददाता, कोरिया (छ.ग.)

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