अशोभनीय आचरण और मारपीट के आरोपों में प्रधान पाठक निलंबित, जांच में आरोप सही पाए गए
बलरामपुर |
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। शासकीय प्राथमिक शाला बैरडीहखुर्द, विकासखंड कुसमी में पदस्थ प्रधान पाठक बीरबल प्रसाद यादव को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रधान पाठक पर विद्यालय की सहायिका के साथ अश्लील हरकत करने, एक ग्रामीण महिला से अभद्र व्यवहार तथा छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट और गाली-गलौज जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
मामला उस समय प्रकाश में आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कुसमी को जांच के निर्देश दिए गए।
नशे की हालत में विद्यालय आने का आरोप
शिकायत में बताया गया कि प्रधान पाठक कथित रूप से शराब के नशे में विद्यालय पहुंचता था। इसी दौरान विद्यालय में भोजन बनाने वाली सहायिका के साथ उसने अश्लील हरकत की। इसके अलावा, एक ग्रामीण महिला के साथ भी उनके द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने की बात सामने आई है। आरोप यह भी है कि नशे की हालत में उन्होंने विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट की और अपशब्दों का प्रयोग किया।
संयुक्त जांच टीम का गठन
शिक्षा विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया। इस टीम में बीईओ कुसमी, सहायक बीईओ, एक प्राचार्य, संकुल समन्वयक और तीन महिला शिक्षिकाओं को शामिल किया गया। जांच टीम ने मौके पर जाकर विद्यालय, संबंधित लोगों और परिस्थितियों की गहन जांच की तथा विस्तृत रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी।
जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि
जांच प्रतिवेदन में प्रधान पाठक पर लगाए गए आरोपों की प्रथम दृष्टया पुष्टि होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान पाठक का व्यवहार न केवल अशिष्ट और अमर्यादित पाया गया, बल्कि यह कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति लैंगिक अपराध की श्रेणी में भी आता है। उनका आचरण एक शिक्षक के लिए निर्धारित नैतिक और सामाजिक मर्यादाओं के पूर्णतः विपरीत माना गया है।
जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधान पाठक का कृत्य कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है, जो छात्रों के भविष्य और विद्यालय के वातावरण के लिए अत्यंत नुकसानदायक है।
नियमों के उल्लंघन पर निलंबन
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, प्रधान पाठक का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-03 का स्पष्ट उल्लंघन है। इसी आधार पर उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत शासकीय सेवा से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान प्रधान पाठक का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बलरामपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें मूल नियम 53 के अंतर्गत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
आगे होगी विभागीय कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है और मामले में आगे की विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई नियमों के अनुसार की जाएगी। शिक्षा विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि छात्रों की सुरक्षा और विद्यालय की गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों का आचरण कितना महत्वपूर्ण है और इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई क्यों आवश्यक है